कोलकाता पुलिस की बड़ी कार्रवाई, डिजिटल अरेस्ट रैकेट का भंडाफोड़
देशभर में “डिजिटल अरेस्ट” और साइबर ठगी के मामलों में तेज़ी से इज़ाफा हो रहा है। हाल के महीनों में सामने आए मामलों में यह साफ देखा गया है कि ठग खुद को पुलिस, CBI, ED या सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल या फोन पर “डिजिटल अरेस्ट” में लेने की धमकी देते हैं।
इन मामलों में बुज़ुर्ग और वरिष्ठ नागरिक सबसे ज़्यादा शिकार बन रहे हैं, जिन्हें डर दिखाकर उनकी जीवन भर की जमा-पूंजी ठग ली जाती है।
इसी कड़ी में कोलकाता पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए डिजिटल अरेस्ट और साइबर धोखाधड़ी से जुड़े एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है।
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हंसखाली थाना क्षेत्र में छापा, दो आरोपी गिरफ्तार
नेताजी नगर थाना, कोलकाता में दर्ज
केस नंबर: 208/25 (दिनांक 12.09.2025)
के तहत पुलिस ने हंसखाली थाना क्षेत्र में छापा मारकर साइबर अपराध में लिप्त एक साजिशन गिरोह का भंडाफोड़ किया।
पुलिस ने सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन करते हुए
07 जनवरी 2026 को रात लगभग 8:40 बजे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
1. देबतानु सरकार (उम्र 25 वर्ष)
2. सौरव बिस्वास (उम्र 27 वर्ष)
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री जब्त की, जिनमें शामिल हैं:
• दो (02) मोबाइल फोन
• आठ (08) बैंक पासबुक और चेकबुक
• छह (06) ATM कार्ड
• एक (01) Tangem कंपनी का हार्डवेयर वॉलेट
• लगभग USD 3,800 के बराबर क्रिप्टोकरेंसी
• क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट और एक्सचेंज से जुड़ी जानकारियां
• आपत्तिजनक चैट्स और दस्तावेज
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किन धाराओं में मामला दर्ज
आरोपियों के खिलाफ
BNS, 2023 की धारा 316(2)/318(4)/319(2)/351(2)/61(2)
के साथ-साथ
आईटी एक्ट 2000 की धारा 66C/66D
और
BNS की धारा 204/308(2)/336(2)/336(3)/338/340(2)
जोड़ी गई हैं।
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डिजिटल अरेस्ट क्या है और कैसे फंसाते हैं ठग?
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट ठगी में अपराधी खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं, फर्जी ID और वर्दी दिखाते हैं और पीड़ित को घर से बाहर न निकलने, बैंक खाते खाली करने या “जांच के लिए” पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं।
बुज़ुर्गों को ज्यादा निशाना इसलिए बनाया जाता है, क्योंकि वे तकनीक से कम परिचित होते हैं और डर के कारण ठगों की बातों में आ जाते हैं।
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पुलिस की अपील
कोलकाता पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि:
• किसी भी वीडियो कॉल या फोन पर खुद को अधिकारी बताने वालों पर भरोसा न करें
• कोई भी सरकारी एजेंसी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती
• संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत नज़दीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं
