एंटी चीटिंग सेक्शन की कार्रवाई में 42 वर्षीय आरोपी गिरफ्तार, नकली मुहर और दस्तावेज़ के जरिए की गई थी बड़ी हेराफेरी
कोलकाता | न्यूज़ डेस्क: महानगर में एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है — जब भरोसा ही हथियार बन जाए, तो सुरक्षा कैसे होगी?
शहर के प्रतिष्ठित व्यावसायिक इलाके कैमैक स्ट्रीट स्थित एक निजी कंपनी में 63 लाख रुपये से अधिक की कथित ठगी का मामला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे खेल में बाहरी गिरोह नहीं, बल्कि कंपनी के ही कर्मचारी शामिल बताए जा रहे हैं।
शिकायत से खुली परतें
यह मामला कंपनी से जुड़े अभिजीत सिन्हा की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कंपनी के कुछ कर्मचारियों ने मिलकर सुनियोजित आपराधिक साजिश रची।
आरोप है कि आरोपियों ने कंपनी की आधिकारिक मुहर और सील का इस्तेमाल कर फर्जी मनी रसीदें तैयार कीं। इन दस्तावेज़ों को असली बताकर करीब 63,53,000 रुपये की वसूली की गई और फिर पूरी रकम का गबन कर लिया गया।
कैसे दिया गया अंजाम?
प्राथमिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि:
• आरोपियों को कंपनी की आंतरिक प्रक्रिया की पूरी जानकारी थी।
• आधिकारिक मुहर और दस्तावेज़ों तक उनकी पहुंच थी।
• रकम वसूलने के लिए भरोसे का इस्तेमाल किया गया।
यानी यह कोई सामान्य धोखाधड़ी नहीं, बल्कि अंदर से रची गई रणनीति थी — जिसे बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।
मामला दर्ज, जांच तेज
शेक्सपियर सरणी थाना/डीडी केस नंबर 14 (दिनांक 18.01.2024) के तहत भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया। जांच की जिम्मेदारी एंटी चीटिंग सेक्शन को सौंपी गई।
लगातार निगरानी और तकनीकी विश्लेषण के बाद 19 फरवरी 2026 को 42 वर्षीय आरोपी को मुर्शिदाबाद जिले के बेहरामपुर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है।
बड़ा सवाल: क्या कंपनी की आंतरिक सुरक्षा में थी चूक?
इस पूरे घटनाक्रम ने कॉर्पोरेट सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं —
• आधिकारिक मुहर और सील तक पहुंच कैसे मिली?
• क्या वित्तीय लेन-देन की आंतरिक ऑडिट प्रणाली कमजोर थी?
• इतनी बड़ी रकम के लेन-देन पर निगरानी क्यों नहीं हुई?
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में आंतरिक ऑडिट और मल्टी-लेवल वेरिफिकेशन सिस्टम बेहद जरूरी होते हैं।
आगे क्या?
पुलिस अब:
• पैसों के ट्रेल की जांच कर रही है
• बैंक लेन-देन का विश्लेषण कर रही है
• अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है
अगर जांच में और नाम सामने आते हैं तो इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
यह मामला सिर्फ 63 लाख की ठगी भर नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे पर चोट है जो किसी भी संस्थान की नींव होता है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में और क्या खुलासे होते हैं — और क्या पूरी रकम की रिकवरी संभव हो पाएगी?
