कोलकाता में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार


 12 लैपटॉप, मोबाइल फोन और डिजिटल सबूत जब्त, अमेरिका में लोगों को बनाया जा रहा था निशाना

कोलकाता साइबर क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। इस मामले में कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और डिजिटल सबूत जब्त किए गए हैं।


यह कार्रवाई साइबर पुलिस स्टेशन , कोलकाता के के तहत दर्ज मामले में की गई है। आरोपियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस ) 2023 की कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।


नर्केलडांगा से मुख्य आरोपी गिरफ्तार

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश और विश्वसनीय सूचना के आधार पर साइबर क्राइम ब्रांच की टीम ने नर्केलडांगा थाना क्षेत्र में छापेमारी की।

इस दौरान 29 जनवरी 2026 को तड़के 04:35 बजे

सरिम रेज़ा (28 वर्ष) निवासी नर्केलडांगा, को गिरफ्तार किया गया।


आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन जब्त किए गए। जांच में सामने आया है कि सरिम रेज़ा इस फर्जी कॉल सेंटर का मुख्य संचालक और आयोजक था। पुलिस को उसके खिलाफ पर्याप्त डिजिटल और तकनीकी सबूत मिले हैं।


बिश्नुपुर में दूसरी रेड, 4 और आरोपी पकड़े गए

मुख्य आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर साइबर पुलिस ने दक्षिण 24 परगना के बिश्नुपुर थाना क्षेत्र में दूसरी छापेमारी की।

29 जनवरी 2026 को सुबह 7:50 से 8:00 बजे के बीच, सोनारगांव स्थित एक कमरे से चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जो अवैध कॉल सेंटर चला रहे थे।


गिरफ्तार आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं:

1. संदीप चौधरी (40) – निवासी खिदिरपुर, कोलकाता

2. अंकित प्रदीप (27) – निवासी दक्षिण दिल्ली

3. नाज़िश अहमद (32) – निवासी तिलजला, कोलकाता

4. मो. आसिफ अख्तर (26) – निवासी टालटाला, कोलकाता


जांच में खुलासा हुआ है कि ये आरोपी अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाकर खुद को पेपाल का अधिकारी बताकर ठगी कर रहे थे।


बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान जब्त

छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए:


कुल जब्ती:

12 लैपटॉप

3 वाई-फाई राउटर

6 मोबाइल फोन

5 कॉलिंग व लिसनिंग हेडफोन

बड़ी मात्रा में डिजिटल डेटा और इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज


सभी जब्तियां कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए, गवाहों और स्थानीय पुलिस की मौजूदगी में की गईं।


ऐसे दिया जाता था साइबर ठगी को अंजाम

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह खुद को पेपाल का कस्टमर और टेक्निकल सपोर्ट बताकर अमेरिका में लोगों को कॉल करवाता था।

फर्जी संपर्क नंबरों को सोशल मीडिया और वेब प्लेटफॉर्म पर पेपाल का आधिकारिक नंबर बताकर प्रचारित किया जाता था।


जब पीड़ित माइक्रोसॉफ़्ट टीम्स के जरिए संपर्क करते, तो आरोपी उन्हें टीमव्यूअर , एनीडेस्क और अल्ट्राव्यूअर जैसे रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाते।

इसके बाद पीड़ितों के कंप्यूटर और पेपल अकाउंट पर अनधिकृत पहुंच हासिल कर पैसे निकाल लिए जाते थे, जिन्हें विदेशी बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर किया जाता था।


अपनी पहचान छिपाने के लिए आरोपी एक्सप्रेसवप्न जैसे अत्याधुनिक वीपीएन का इस्तेमाल करते थे और पीड़ितों को नकली पेपल और अमेरिकी संस्थाओं के दस्तावेज भेजकर गुमराह किया जाता था।


जांच जारी, और गिरफ्तारियां संभव

साइबर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।

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