फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, चार साइबर ठग गिरफ्तार, 24 मोबाइल और सैकड़ों फर्जी दस्तावेज ज़ब्त


 कोलकाता 18 दिसंबर- साइबर क्राइम ब्रांच ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए शहर में चल रहे एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। यह कार्रवाई 18 दिसंबर को विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर की गई। मामले में झारखंड से संचालित एक साइबर ठग गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है।


पुलिस के अनुसार, साइबर पुलिस स्टेशन, कोलकाता में दर्ज जीडीई नंबर 376/25 के तहत आईटी एक्ट और बीएनएस की कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम ने गोल्फ ग्रीन थाना क्षेत्र के बिक्रमगढ़ इलाके में स्थित एक फ्लैट में छापेमारी की, जहां बिना किसी वैध दस्तावेज के कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था।


जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को देश के नामचीन अस्पतालों और ट्रांसपोर्ट विभाग का प्रतिनिधि या बुकिंग एग्जीक्यूटिवबताकर लोगों से संपर्क कर रहे थे। वे मरीजों और उनके परिजनों को होटल बुकिंग, परिवहन सुविधा और इलाज से जुड़ी मदद का झांसा देते थे।


इतना ही नहीं, आरोपी फर्जी एंड्रॉयड ऐप (.apk फाइल) बनाकर व्हाट्सऐप के जरिए लोगों को भेजते थे। इन ऐप्स को इंस्टॉल करते ही पीड़ितों के मोबाइल पर ठगों का नियंत्रण हो जाता था, जिससे वे फोन-पे और अन्य डिजिटल भुगतान ऐप्स के जरिए खातों से पैसे उड़ा लेते थे।


छापेमारी के दौरान मौके पर मौजूद लोग कॉल सेंटर संचालन से जुड़े कोई वैध कागजात नहीं दिखा सके। इसके बाद पुलिस ने तलाशी लेकर बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री जब्त की।


गिरफ्तार आरोपियों की पहचान

जमशेद अंसारी (27),

एमडी सोएब अंसारी (25),

बीरेंद्र पंडित (27) और

प्रदीप मंडल (25)

के रूप में हुई है। चारों आरोपी झारखंड के गिरिडीह जिले के रहने वाले हैं।


पुलिस ने इनके पास से

एक मैकबुक,

एक जियो राउटर,

24 मोबाइल फोन,

लगभग 250 फर्जी म्यूल पैन कार्ड और उनके विवरण,

साथ ही कई आपत्तिजनक दस्तावेज और स्क्रीनशॉट बरामद किए हैं।


साइबर क्राइम ब्रांच के अनुसार, यह गिरोह देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों को निशाना बना रहा था। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं तथा ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई है।


पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी अनजान कॉललिंक या ऐप के झांसे में  आएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचनातुरंत साइबर पुलिस को दें।

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